कला और संवाद से टूटीं मासिक धर्म की वर्जनाएँ

‘लेट्स टॉक खुलकर’ कार्यक्रम में 150 से अधिक युवाओं की भागीदारी

जगदलपुर | मासिक धर्म से जुड़े सामाजिक मौन और वर्जनाओं को तोड़ने की दिशा में एक सशक्त पहल के रूप में ‘लेट्स टॉक खुलकर’ कार्यक्रम का आयोजन दलपत सागर स्थित बस्तर आर्ट गैलरी में किया गया। इस युवा-नेतृत्व वाली पहल में क्षेत्र भर से 150 से अधिक युवाओं ने भाग लिया।
कार्यक्रम का उद्देश्य मासिक धर्म (पीरियड्स) से जुड़े मिथकों, भेदभाव और सामाजिक कलंक को चुनौती देना तथा कला, संवाद और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से जागरूक और सहयोगी समाज के निर्माण को बढ़ावा देना रहा। यह पहल युवाओं को अपने समुदायों में सामाजिक एवं व्यवहारगत परिवर्तन के अग्रदूत के रूप में सशक्त बनाने का प्रयास करती है।
यह कार्यक्रम Alliance of Behaviour Change के सहयोग से आयोजित किया गया, जो 140 से अधिक गैर-सरकारी और नागरिक समाज संगठनों का एक साझा मंच है। इस सहयोग ने यह संदेश दिया कि गहराई से जड़ जमाए सामाजिक मानदंडों को बदलने के लिए बहु-हितधारक साझेदारी अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम के दौरान कला, हस्तशिल्प, कहानी-कथन, नुक्कड़ नाटक और ओपन माइक सत्रों के माध्यम से मासिक धर्म जैसे संवेदनशील विषय पर खुलकर संवाद किया गया। वक्ताओं ने बताया कि एक औसत महिला अपने जीवन के लगभग 2,400 दिन मासिक धर्म का अनुभव करती है, जो शारीरिक पीड़ा, मानसिक तनाव और सामाजिक भेदभाव से जुड़ा होता है। ऐसे में सही जानकारी, संसाधनों तक पहुंच और खुले संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
UNICEF के प्रतिनिधि चंदन कुमार ने कहा कि केवल जागरूकता पर्याप्त नहीं है, बल्कि परिवारों, समुदायों और पुरुषों की सहभागिता से व्यवहारगत परिवर्तन को बढ़ावा देना जरूरी है।
चर्चा के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता करमजीत कौर ने आदिवासी क्षेत्रों की महिलाओं की चुनौतियों को सामने रखते हुए बताया कि आज भी कई महिलाएँ मासिक धर्म के दौरान अस्वच्छ साधनों का उपयोग करने को मजबूर हैं, जिससे गंभीर स्वास्थ्य जोखिम उत्पन्न होते हैं। उन्होंने सुरक्षित मासिक धर्म उत्पादों की उपलब्धता और जमीनी स्तर पर जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय सेवा योजना, भारत स्काउट्स एंड गाइड्स तथा युवोदय के युवा स्वयंसेवकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई और नुक्कड़ नाटकों व संवादात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रभावशाली संदेश दिया।
कार्यक्रम का क्यूरेशन अर्चना आर्ट स्टूडियो द्वारा किया गया, जबकि संचालन कलाकार एवं मानवतावादी तमन्ना जैन ने किया।
कार्यक्रम का समापन एक सामूहिक संकल्प के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने मासिक धर्म स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने, सामाजिक वर्जनाओं को चुनौती देने और महिलाओं व लड़कियों के लिए गरिमापूर्ण व समान अवसरों वाला समाज बनाने का संकल्प लिया।

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