जगदलपुर . छत्तीसगढ़ प्रदेश मदरसा बोर्ड के पूर्व सदस्य अनवर खान ने प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। आम जनता समस्याओं से जूझ रही है। सरकार बड़े-बड़े दावे कर रही है, मगर प्रदेश की जनता को जमीनी स्तर पर बुनियादी सुविधाओं और आवश्यक जरूरतों की पूर्ति के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि पंचायतों से सुशासन त्यौहार के नाम पर अवैध वसूली की जा रही है। शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़े हुए हैं। कई पंचायतों के जनप्रतिनिधि संसाधनों और बजट की कमी से परेशान हैं। प्रदेश भर में पंचायत व्यवस्था कमजोर हो रही है, जिससे ग्रामीण विकास प्रभावित हो रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सुशासन त्यौहार से सरपंच परेशान और हताश होकर सामूहिक इस्तीफे दे रहे हैं, लेकिन इस पर सरकार की कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सरकार अपनी नाकामी छुपाने के लिए सुशासन त्यौहारों के माध्यम से जनता का ध्यान भटकाने का कार्य कर रही है।
अनवर खान ने कहा कि राज्य सरकार विशेष पिछड़ी जनजातियों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन करने में पूरी तरह विफल साबित हुई है। बस्तर और आदिवासी अंचलों के विकास को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होना चाहिए, लेकिन जमीनी हकीकत इसके विपरीत दिखाई दे रही है।
उन्होंने बताया कि तुषार मानिक के साथ हुई मारपीट की घटना के विरोध में आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर सोमवार से तहसीलदार और नायब तहसीलदार मियादी हड़ताल पर हैं। अनिश्चितकालीन कलमबंद और कामबंद हड़ताल से राजस्व एवं शासकीय कार्य पूरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि एक तरफ छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार सुशासन त्यौहार मना रही है और दूसरी तरफ प्रशासनिक अधिकारी सरकार के रवैये के विरोध में हड़ताल कर रहे हैं। इससे सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक ओर सुशासन का ढकोसला किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक अधिकारी दुव्यर्वहार और असुरक्षा का शिकार हो रहे हैं।