बस्तर में परिवहन व्यवस्था पर असर डाल सकता है केंद्र का नया फैसला, बढ़ती महंगाई को लेकर चिंता

जगदलपुर। पूर्व विधायक एवं पूर्व संसदीय सचिव रेखचंद जैन ने केंद्र सरकार के हालिया फैसलों को लेकर बस्तर क्षेत्र में परिवहन व्यवसाय और महंगाई पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देशों को “तुगलकी फरमान” बताते हुए कहा कि बस्तर जैसे दूरस्थ और परिवहन-निर्भर क्षेत्र की वास्तविक परिस्थितियों की अनदेखी की जा रही है।

रेखचंद जैन का कहना है कि बस्तर संभाग के सातों जिलों में व्यापार और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति मुख्य रूप से ट्रकों के जरिए होती है। ऐसे में डीजल उपयोग की अधिकतम सीमा तय करने जैसे फैसले परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं। उनका दावा है कि इससे माल ढुलाई प्रभावित होगी और आने वाले समय में महंगाई बढ़ने की आशंका लोगों में गहराती जा रही है।

उन्होंने कहा कि बस्तर का परिवहन संघ क्षेत्र की “लाइफ लाइन” माना जाता है, क्योंकि स्थानीय कारोबार काफी हद तक इसी व्यवस्था पर निर्भर करता है। जैन ने आरोप लगाया कि वर्ष 2017-18 में परिवहन संघ पर कार्रवाई से जुड़े घटनाक्रम ने व्यवसायियों को गहरी परेशानी में डाला था, जबकि बाद में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के प्रयासों से स्थिति में सुधार हुआ।

पेट्रोल-डीजल कीमतों में बढ़ोतरी पर भी चिंता

पूर्व विधायक ने कहा कि पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर बस्तर के परिवहन क्षेत्र पर पड़ रहा है। उनका आरोप है कि परिवहन कारोबार लगातार घाटे की ओर बढ़ रहा है, जबकि आवश्यक उपभोक्ता वस्तुओं के दाम बढ़ने से आम जनता पहले ही दबाव में है।

केंद्र सरकार पर साधा निशाना

रेखचंद जैन ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों, महंगाई नियंत्रण और अन्य मुद्दों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनता को बढ़ती कीमतों और रुपये की स्थिति पर स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि चुनावी वादों और जमीनी अमल के बीच अंतर को लेकर लोगों में असंतोष है।

बस्तर जैसे भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में परिवहन व्यवस्था किसी भी आर्थिक गतिविधि की रीढ़ मानी जाती है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर उठ रही चिंताओं ने परिवहन लागत और महंगाई को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

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