जगदलपुर, 27 मार्च . नियति की मार देखिए, जिस उम्र में बस्तर के बोड़नपाल निवासी 14 वर्षीय उदय बघेल के पैरों में चपलता और आंखों में भविष्य के सुनहरे ख्वाब होने चाहिए थे, उसी उम्र में उसके मासूम दिल ने साथ छोड़ना शुरू कर दिया था। लामकेर के बालक छात्रावास में रहकर कक्षा 9 वीं की पढ़ाई कर रहे इस होनहार छात्र के लिए जीवन तब बोझिल होने लगा, जब मामूली दौड़-भाग भी उसकी सांसें उखाड़ने लगी। छात्रावास की दीवारों ने उदय की उस खामोश तड़प और कमजोरी को करीब से महसूस किया, जिसे वह चाहकर भी शब्दों में बयां नहीं कर पा रहा था। जब विवश पिता लखू बघेल अपने लाड़ले को लेकर अस्पताल पहुंचे, तो मेडिकल रिपोर्ट ने परिवार के पैरों तले जमीन खिसका दी। जांच में पता चला कि उदय रुमैटिक हार्ट डिजीज जैसी गंभीर बीमारी की गिरफ्त में है और उसके दिल के वाल्व बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। रिपोर्ट के तकनीकी आंकड़ों में उलझी उदय की जिंदगी और पिता की आंखों में उमड़ते बेबसी के आंसू, एक गहरे संकट की ओर इशारा कर रहे थे।
पहाड़ जैसी इस विपदा के बीच उम्मीद की पहली किरण जिला प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्र के माध्यम से परिलक्षित हुई। उदय के मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्र की टीम ने तत्काल सक्रियता दिखाई और बच्चे की गंभीर स्थिति का गहन विश्लेषण किया। जब अन्य बड़े संस्थानों में प्रक्रियात्मक देरी और आर्थिक बाधाओं के कारण इलाज अधर में लटका हुआ था, तब जिला प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्र और डॉ. शिवम की टीम ने एक सुरक्षा कवच बनकर इस गरीब परिवार को संभाला। समय की कमी और उदय की लगातार गिरती सेहत को देखते हुए टीम ने बिना वक्त गंवाए रायपुर के एसएमसी हार्ट इंस्टीट्यूट से समन्वय स्थापित किया। डॉ. शिवम और उनकी टीम ने स्वयं बोड़नपाल पहुंचकर परिजनों की काउंसलिंग की और उन्हें इस डर से बाहर निकाला कि संसाधनों के अभाव में भी उदय का जीवन बचाया जा सकता है।
जिला प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्र की तत्परता और सही मार्गदर्शन का ही परिणाम था कि उदय को तुरंत रायपुर शिफ्ट किया गया। वहाँ आयुष्मान योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और अस्पताल के विशेष सहयोग से बिना किसी अतिरिक्त वित्तीय बोझ के उदय का अत्यंत जटिल डबल वाल्व रिप्लेसमेंट ऑपरेशन बुधवार 25 मार्च को सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। मेडिकल रिपोर्ट में दर्ज सिवियर एमआर और वाल्व की अन्य जटिलताओं को रायपुर के कुशल कार्डियक सर्जन्स ने अपनी विशेषज्ञता से दूर कर दिया। ऑपरेशन थिएटर के बाहर जब तक सर्जरी चलती रही, पिता की सांसें अटकी रहीं, लेकिन जैसे ही डॉक्टरों ने उदय के सफल ऑपरेशन की सूचना दी, मानों बस्तर के एक सूने घर में खुशियों का नया सवेरा हो गया। आज उदय के सीने में धड़क रहा नया दिल न केवल आधुनिक चिकित्सा की जीत है, बल्कि जिला प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्र और समर्पित डॉक्टरों के सेवाभाव की एक मर्मस्पर्शी मिसाल भी है, जिसने एक होनहार छात्र को फिर से स्कूल की दहलीज तक पहुँचाने का मार्ग प्रशस्त किया है।