250 साल पुराने ऐतिहासिक मंदिर में नाव से पहुंचे हजारों श्रद्धालु, प्रशासन ने की थी विशेष व्यवस्था
जगदलपुर 15 फरवरी
बस्तर के ऐतिहासिक और धार्मिक गौरव का प्रतीक ’’दलपत सागर’’ आज शिवभक्तों के जयकारों से गूंज उठा। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर शहर के बीचों-बीच स्थित ऐतिहासिक श्दलपत शिव धामश् में भगवान भोलेनाथ के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का भारी तांता लगा रहा।
नाव के सहारे पहुंचे भक्त, आस्था का अनूठा संगम
छत्तीसगढ़ के दूसरे सबसे बड़े तालाब के रूप में विख्यात दलपत सागर के ठीक मध्य में स्थित यह शिव मंदिर अपनी अनूठी बनावट और स्थान के लिए जाना जाता है। मंदिर तक पहुँचने का एकमात्र जरिया जलमार्ग है। आज सुबह से ही भक्त ’’नाव और मोटर बोट’’ के जरिए मंदिर पहुँचते नजर आए। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए नगर निगम और जिला प्रशासन के सहयोग से विशेष मोटर बोट की व्यवस्था की गई थी।
250 साल पुराना गौरवशाली इतिहास
बताया जाता है कि इस ऐतिहासिक मंदिर का निर्माण लगभग 250 वर्ष पूर्व राजा दलपत देव ने करवाया था। बस्तर की संस्कृति और आस्था का केंद्र यह मंदिर साल भर लोगों के आकर्षण का केंद्र रहता है, लेकिन महाशिवरात्रि पर यहाँ का नजारा देखते ही बनता है।
दर्शन मात्र से पूरी होती है मनोकामना
दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास है कि इस मंदिर में महादेव के दर्शन मात्र से ही जीवन के कष्ट दूर होते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। मंदिर परिसर में सुबह से ही लंबी-लंबी कतारें लगी रहीं, जहाँ लोग घंटों अपनी बारी का इंतजार करते दिखे।
” बाबा भोलेनाथ के इस स्वरूप के दर्शन के लिए हम साल भर इंतजार करते हैं। सागर के बीच नाव से जाना और फिर महादेव की पूजा करना एक अद्भुत अनुभव है।”एक श्रद्धालु
प्रशासन द्वारा सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे ताकि जलमार्ग से यात्रा कर रहे श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की असुविधा न हो। देर शाम तक भक्तों के आने का सिलसिला जारी रहा।