आईपीएस किरण चव्हाण के नेतृत्व में सुकमा ने पाई नई पहचान
डॉ सैयद फारूख अली के कलम से…

किरण चव्हाण पुलिस अधीक्षक सुकमा
सुकमा २८ जनवरी . साल 2022 में जब आईपीएस अधिकारी किरण चव्हाण ने सुकमा जिले में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के रूप में पदभार संभाला, उस समय जिला माओवाद की भयावह गिरफ्त में था। नक्सली गतिविधियां अपने चरम पर थीं और आम ग्रामीण भय व असुरक्षा के माहौल में जीवन यापन कर रहे थे।
आज वही सुकमा जिला नक्सलवाद के अंधेरे से निकलकर शांति, सुरक्षा और विकास की नई इबारत लिख रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा मार्च 2026 तक नक्सल-मुक्त भारत के लक्ष्य से पहले ही, आईपीएस किरण चव्हाण के सशक्त नेतृत्व में सुकमा को नक्सल आतंक से बड़ी आज़ादी मिली है।
नेतृत्व जिसने बदली ज़मीन की हकीकत
पुलिस अधीक्षक के रूप में पदभार ग्रहण करने के बाद एसपी किरण चव्हाण ने केवल सुरक्षा अभियानों तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि ग्रामीणों के भरोसे को जीतने की कार्यप्रणाली अपनाई। इसी का नतीजा है कि आज दूरस्थ आदिवासी अंचलों में भी शासन और विकास की मौजूदगी साफ़ दिखाई देने लगी है।
ऐतिहासिक गणतंत्र दिवस: पहली बार लहराया तिरंगा
यह पहली बार है जब सुकमा जिले के कई ऐसे सुदूर और पूर्व में नक्सल प्रभावित इलाकों में गणतंत्र दिवस पर तिरंगा फहराया गया, जहाँ दशकों तक ऐसा सोचना भी संभव नहीं था।
ग्रामीणों द्वारा तिरंगा फहराना इस बात का प्रमाण है कि डर की जगह अब विकास और लोकतंत्र की भावना जाग चुकी है। यह बदलाव सीधे तौर पर एसपी किरण चव्हाण की कार्यप्रणाली और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था का परिणाम माना जा रहा है।
सुरक्षा का मजबूत नेटवर्क
अब तक जिले में 28 नवीन सुरक्षा कैम्प स्थापित किए जा चुके हैं।
इन कैम्पों के खुलने से—
• माओवादियों के गढ़ ध्वस्त हुए
• पुलिस की अंदरूनी क्षेत्रों तक प्रभावी पहुंच बनी
• ग्रामीणों को स्थायी सुरक्षा का एहसास हुआ
आंकड़े जो बदलाव की गवाही देते हैं
एसपी किरण चव्हाण के कार्यकाल में—
• 771 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया
• 499 माओवादी गिरफ्तार किए गए
• 76 बड़े व छोटे कैडर के नक्सली मारे गए
ये आंकड़े केवल पुलिस कार्रवाई नहीं, बल्कि सुकमा में लौटते भरोसे और लोकतंत्र की जीत की कहानी कहते हैं।
विकास की ओर बढ़ता सुकमा
सुरक्षा बहाली के साथ अब सरकार की महत्वाकांक्षी योजना “नियद नेल्लानार” के माध्यम से सुदूर गांवों तक विकास पहुंच रहा है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और मूलभूत सुविधाओं का विस्तार हो रहा है।
भय से विश्वास तक
आईपीएस किरण चव्हाण के नेतृत्व में सुकमा जिला अब—
• भय नहीं, भरोसे की पहचान बन रहा है
• बंदूक नहीं, संविधान की ताकत दिखा रहा है
• और नक्सलवाद से मुक्त, विकसित भविष्य की ओर आगे बढ़ रहा है. जहाँ कभी खामोशी और डर था, आज वहाँ तिरंगा लहरा रहा है — यही सुकमा की नई कहानी है।