बीजापुर। जिले में आत्मसमर्पित माओवादियों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक सकारात्मक पहल सामने आई है। ‘उल्लास – नव भारत साक्षरता कार्यक्रम’ के तहत 85 आत्मसमर्पित माओवादियों ने बुनियादी साक्षरता परीक्षा में हिस्सा लिया। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप संचालित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य शिक्षा से वंचित रहे लोगों को पढ़ना-लिखना सिखाकर उन्हें साक्षर बनाना है। प्रशासन के अनुसार, इससे पहले 272 आत्मसमर्पित नक्सल कैडर्स इस प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूरा कर चुके हैं और अब सामान्य नागरिकों की तरह जीवन यापन कर रहे हैं। इसी कड़ी में प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके 85 अन्य कैडर्स ने भी परीक्षा देकर साक्षरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। छत्तीसगढ़ शासन की ‘नक्सल आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति’ के तहत इन सभी को न केवल आर्थिक सहायता और रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण दिया जा रहा है, बल्कि शिक्षा के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास भी किया जा रहा है। बीजापुर पुलिस और जिला प्रशासन का मानना है कि शिक्षा ही वह माध्यम है, जिससे भटके हुए युवाओं को हिंसा के रास्ते से हटाकर समाज की मुख्यधारा में जोड़ा जा सकता है। पुलिस प्रशासन लगातार माओवादियों से अपील कर रहा है कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण करें और शासन की योजनाओं का लाभ उठाकर एक शांतिपूर्ण और सम्मानजनक जीवन की शुरुआत करें।