जहां हुई थी नक्सलियों से मुठभेड़, वहां पसरा सन्नाटा

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तीन जिलों की सीमा पर हुई मुठभेड़
जगदलपुर/  पुलिस महानिरीक्षक सुंदराज पी ने बताया कि यह मुठभेड़ कांकेर, नारायणपुर और महाराष्ट्र के गढ़चिरौली के त्रिकोणीय स्थान पर हुई । उनके अनुसार यह जगह नक्सलियों के सुरक्षित पनाह माने जाते थे। सुंदरराज ने बताया कि उत्तर बस्तर डिवीजन कमेटी में लगभग 70 से 80 नक्सली है, जिसमें माओवादियों की चार क्षेत्र समितियां हैं, रावघट, परतापुर कुवे और किसकोड़ो। ये डिविजन अलग अलग काम सम्भालती हैं। उत्तर बस्तर डिवीजन समिति अवैध लेवी वसूली और दसद आपूर्ति नेटवर्क संभालती है।


नक्सलियों के 22 हथियार फोर्स को मिले, जिसमें एक नग एके 47, एक नग कबाईन, एक नग एसएलआर, दो नग इंसास, तीन नग श्री नाट थी तीन, 10 नग 12 बोर की बंदूक, दो यूबीजीएल बंदूक, दो 9 एमएम पिस्टल, 6 यूबीजीएल जिसमें 04 जिंदा और 2 खोखे, कारतूस, एक नग कुकर बम, वर्दी, नक्सली साहित्य, सोलर प्लेट व खाने की सामग्री फोर्स के हाथ लगी।

नक्सल प्रभावित कांकेर जिले के हिदुर और कल्पर गांव के जंगल में मुठभेड़ के बाद अब सन्नाटा पसरा हुआ है। ग्रामीण अनजान लोगों को देखकर कुछ भी बोलने बच रहें हैं। राज्य के नक्सल प्रभावित इस जिले के छोटेबेठिया थाना क्षेत्र के अंतर्गत हिदुर और कल्पर गांव के करीब जंगल में मंगलवार को चार घंटे मुठभेड़ चली थी। इस मुठभेड़ में 29 नक्सली मारे गए थे। बांस की झाड़ियों में और पेड़ों पर खून के धब्बे और गोलियों के निशान नक्सल विरोधी अभियान की तीव्रता बताते हैं। मुठभेड़ वाली जगह के नजदीक के गांवों में ज्यादातर स्थानीय आदिवासी महिलाएं देखी गईं। वे अपनी रोजमर्रा के कामों में व्यस्त हैं । मंगलवार की दोपहर पहाड़ी पर क्या हुआ पूछने पर वह कुछ भी बोलने से हिचक रहे हैं।

इस बीच खुद को क्षेत्र के अकामेटा गांव के निवासी बताने वाले लिंगाराम ने बताया कि उसका चचेरा भाई एवं सक्रिय नक्सली सुक्कू मुठभेड़ में मारा गया। मुठभेड़ स्थल तक पहुंचने के कच्चे रास्ते को कई स्थानों पर खोद दिया गया है। यहां लोकसभा चुनाव के बहिष्कार के संदेश वाले नक्सली पोस्टर लगे हुए हैं।

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