जगदलपुर/ हाल ही में भानपुरी निवासी कमला नेताम ने रसूखदार व्यक्ति के अन्याय की आवाज सोशल मीडिया में उठाकर सरकार तक अपनी बात पहुँचाई । इसके अलावा बस्तर में बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा के प्रमुख संयोजक नवनीत चांद लगातार विडियो बनाकर सरकार को चेता रहे हैं। ऐसे सोशल मीडिया में अनगिनत उदाहरण देखने को मिल जाते हैं जिसमें लोग प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाते नजर आते है। ।जिस तरह आज आम जनता न्याय पाने के लिए सोशल मीडिया का सहारा ले रही है,उससे कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
क्या इस देश में आम आदमी के लिए न्याय पाना दिन-ब-दिन मुश्किल होता जा रहा है?

क्या न्याय अब सिर्फ चंद रसूखदार लोगों तक ही सीमित रह गया है?
बीते कुछ समय से देखा जा रहा है कि लोग अपनी समस्याएं और शिकायतें सीधे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर डाल रहे हैं।कई मामलों में सोशल मीडिया के दबाव के बाद प्रशासन हरकत में आता भी दिखाई देता है। सोशल मीडिया पर आने वाली हर सामग्री जरूरी नहीं कि पूरी तरह सही ही हो। कई बार लोग मज़ाक या सिर्फ नाम और पैसा कमाने के उद्देश्य से भी कंटेंट बनाते हैं। लेकिन जब किसी गंभीर समस्या की बात आती है, तो प्रशासन को सतर्क होना ही पड़ता है।
लम्बे समय से लोगों की समस्याओं को प्रशासन तक सोशल मीडिया के माध्यम से पहुँचाने आ रहे पत्रकार दिलीप गुहा कहते हैं – “प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भरोसा आम जनता का भरोसा उठ गया है। कई कारण हो सकते हैं । लोग प्रकिया कम त्वरित एक्शन चाहते हैं।”
पत्रकार अजय श्रीवास्तव का मानना है “सोशल मीडिया एक मजबूत माध्यम जरूर है, लेकिन इसकी विश्वसनीयता की जांच बेहद जरूरी है। और निरपेक्ष होना चाहिए । नीजि मसले सोशल मीडिया में नहीं आने चाहिए । दोनों पक्षों का ध्यान रखा जाना चाहिए।”
सोशल मीडिया के जरिए जनता अपनी आवाज़ उठा रही है।प्रशासन भी जनता के हित में काम करता है,इसलिए ऐसी शिकायतों को गंभीरता से लेना उसकी जिम्मेदारी बनती है।
दिलीप गुहा के मुताबिक –“लोग यही सोचते हैं कि शिकायत उच्चाधिकारियों को करें तो वह कुछ नहीं करने वाला क्योंकि हिस्सा उसके पास भी जाता होगा। वे यह भी मानते हैं कि सिस्टम पूरी तरफ से भ्रष्ट नहीं है ।”
कुल मिलाकर सोशल मीडिया आज आम आदमी की आवाज़ बनता जा रहा है,लेकिन इसके सही और जिम्मेदार इस्तेमाल की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा है।ताकि न्याय केवल वायरल होने तक सीमित न रहे, बल्कि ये ज़मीनी स्तर पर भी हर आम नागरिक तक पहुंचे।