अंततः सरकार ने अपनी असफलता मानी

सुपर स्पेशलिटी अस्पताल नीजि हाथों में

जगदलपुर रिपोर्टों के अनुसार राज्य सरकार ने पहले नागरनार स्टील प्लांट जैसे बड़े सार्वजनिक प्रोजेक्ट संचालित करने की बात कही थी। लेकिन अब सरकार द्वारा बस्तर के सुपर-स्पेशियलिटी सरकारी अस्पताल को कॉन्टिनेंटल हेल्थ ग्रुप को सौंपने के निर्णय पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
इस फैसले के बस्तर क्षेत्र की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंताएँ व्यक्त की जा रही हैं।
बस्तर जिले के वरिष्ठ अधिवक्ता संकल्प दुबे ने सवाल उठाया है कि क्या निजी संचालक अपनी हैदराबाद स्थित अस्पताल से अनुभवी सुपर-स्पेशियलिस्ट डॉक्टरों की स्थायी नियुक्ति जगदलपुर में करेगा, ताकि बस्तर के मरीजों को निरंतर उपचार मिल सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट करने की मांग की कि निजी प्रबंधन के तहत मरीजों से उपचार के लिए कितनी दरें ली जाएंगी।
दुबे ने यह भी प्रश्न किया कि क्या अस्पताल में नियुक्त अधीक्षक (सुपरिंटेंडेंट) जनहित में निजी अस्पताल के कार्य और कार्यप्रणाली पर प्रभावी निगरानी रख पाएंगे। उन्होंने कहा कि इन सवालों का उत्तर जगदलपुर विधायक और बस्तर सांसद को देना चाहिए।
इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ भी सामने आई हैं। संभागीय अध्यक्ष जनमुक्ति मार्चा नवनीत चांद ने कहा कि बस्तर के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का अधिकार है और अस्पताल के संचालन में पारदर्शिता व जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।
एक बयान में मुक्ति मोर्चा/जोगी कांग्रेस ने केंद्र और राज्य सरकारों तथा जनप्रतिनिधियों से अपील की कि बस्तर के एकमात्र सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल की सुविधाओं से कोई समझौता न किया जाए। पार्टी ने मांग की कि कॉन्टिनेंटल हेल्थ ग्रुप तुरंत अपनी हैदराबाद स्थित अस्पताल से विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति कर बस्तर में सेवाएँ शुरू करे।
पार्टी ने यह भी कहा कि भर्ती या मशीनों की स्थापना के नाम पर सेवाएँ शुरू करने में देरी स्वीकार्य नहीं होगी।
नवनीत चांद ने आगे कहा कि यदि राज्य स्वास्थ्य विभाग, स्थानीय जनप्रतिनिधि, बस्तर संभागायुक्त तथा अस्पताल प्रबंधन विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति से संबंधित आदेश पत्र और उनके नाम सार्वजनिक नहीं करते हैं, तो अस्पताल के बाहर विरोध प्रदर्शन किया जा सकता है।
क्षेत्र में उन्नत चिकित्सा सुविधाओं की सीमित उपलब्धता को देखते हुए, नागरिक और संबंधित पक्ष इस बात पर नज़र बनाए हुए हैं कि बस्तर के एकमात्र सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल के निजी प्रबंधन में जाने से सेवा गुणवत्ता, लागत और जवाबदेही पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

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