सभी अल्पसंख्यक नेता हुए एकजुट, कांग्रेस को जिताने का लिया संकल्पः एम. डब्ल्यू. अंसारी

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 करीम
भोपाल 15 जून . हमारे मध्य प्रदेश में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं। विधानसभा चुनाव में बहुत कम समय बचा है। सभी ने अपनी-अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। हर उम्मीदवार हर पार्टी वोटरों को रिझाने में लगे हुए हैं। ऐसे में रविवार 11 जून को सभी अल्पसंख्यक और सेक्युलर नेताओं ने मिल कर उत्तराखंड और मणिपुर के पूर्व राज्यपाल कांग्रेस नेता डॉ. अज़ीज़ कुरैशी के बंगले पर एक सभा की। बैठक में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और दलित नेताओं सहित पूरे प्रांत के अल्पसंख्यक नेताओं ने भाग लिया। सभी ने अपनी राजनीतिक और सामाजिक बेदारी का सुबुत देते हुए पूरी ताकत से कांग्रेस पार्टी को जिताने की बात कही, सभी ने एकमत से कांग्रेस आलाकमान सोनिया गांधी, अध्यक्ष मल्लिका अर्जुन खड़गे और प्रियंका गांधी पर पूरा भरोसा जताया। राहुल गांधी, दरअसल, यह बैठक उत्तराखंड और मणिपुर के पूर्व राज्यपाल कांग्रेस नेता डॉ. अज़ीज़ कुरैशी के नेतृत्व में हुई थी। बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए डॉ अज़ीज़ कुरैशी ने कहा कि अल्पसंख्यक एससी, एसटी, ओबीसी अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हैं और किसी पार्टी के गुलाम नहीं हैं और न ही टिकट या कुर्सी के लिए भीख मांगते हैं। बातचीत के दौरान नेताओं ने अपने विचार व्यक्त किए और कहा कि यह भी साफ है कि कांग्रेस सरकार का पंद्रह महीने का कार्यकाल बहुत अच्छा नहीं रहा, कांग्रेस ने उस तरह की प्रतिक्रिया नहीं दी जैसी उसे देनी चाहिए थी. इसी तरह भाजपा की दोगली सरकार, खरीदी हुई सरकार के पिछले साढ़े तीन-चार साल के दौरान एससी, एसटी, ओबीसी और दलितों पर जिस तरह से अत्याचार हुआ है, और लगातार हो रहे हैं उसके बारे में कांग्रेस को खुलकर बोलना चाहिए था। लेकिन कांग्रेस ने ऐसा नहीं किया। अल्पसंख्यक नेताओं ने इस पर भी नाराजगी जताई और कांग्रेस से इस ओर ध्यान देने की मांग की।
इस बैठक में सभी अल्पसंख्यक नेताओं ने एकजुट होकर एक ओर कांग्रेस को जिताने की बात कही और साथ साथ कुछ मांगें भी कीं जिन्हें कांग्रेस पार्टी को पूरा करना चाहिए। (1) अल्पसंख्यक समुदाय को जनसंख्या के अनुसार 25 से 30 टिकट दिए जाना चाहिए। (2) लगभग 28 से 30 सीटें ऐसी हैं जहां अल्पसंख्यक ही उम्मीदवार होने चाहिए, कांग्रेस को इस पर भी पूरा ध्यान देने की जरूरत है और इन सीटों पर अल्पसंख्यक उम्मीदवार को खड़ा करना चाहिए, इस से अल्पसंख्यक वोट बटने का कोई खतरा नही होगा। (3) 45 निर्वाचन क्षेत्र ऐसे हैं जहां अल्पसंख्यक उम्मीदवार कांग्रेस को जिताने की स्थिति में है, वहां भी पार्टी को ऐसे उम्मीदवार को टिकट देने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। (4) इसके अलावा बैठक में जाती जनगणना कराने की भी मांग की गई। (5) साथ ही पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने की भी मांग की गई है। (6) तमाम अल्पसंख्यक नेताओं ने कांग्रेस हाईकमान से ये भी मांग की है कि कांग्रेस पार्टी में जो भी मनवादी और पुजवादी तत्व है या ऐसे तत्व जो मनवादी और पूजवदी मानसिकता के लोग हैं या जिनकी पृष्ठभूमि आरआरएस है, जिनकी सोच सावरकर और गोडसे की है ऐसी मानसिकता के सभी लोगों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाना चाहिए और भविष्य में बीजेपी और ऐसे सभी तत्व जो आरएसएस के बैग ग्राउंड या मानसिकता वाले हैं, उनके लिए कांग्रेस के दरवाजे बंद कर देना चाहिए। भारत का शासन भारत के संविधान और गांधीजी की विचारधारा से चलेगा न कि सावरकर या गोडसे की सोच और विचारधारा से (7) सभी ने एकमत होकर कहा कि चूंकि मध्य प्रदेश एसटी एससी, ओबीसी बहुल प्रांत है, इसलिए अगला मुख्यमंत्री दलित एससी एसटी या ओबीसी होना चाहिए। (8) इसके अलावा महंगाई, बेरोजगारी, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा, बेटियों की सुरक्षा आदि कई समसामयिक मुद्दों पर कांग्रेस का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया गया। सरकारी नौकरियों, बैंकों, पुलिस, सेना और अन्य अर्धसैनिक बलों में अल्पसंख्यकों का प्रतिनिधित्व भी लगभग न के बराबर है। निजी बड़े उद्योगों का भी यही हाल है। इस बैठक में प्रमुख रूप से सैयद साजिद अली एडवोकेट, पूर्व केंद्रीय मंत्री असलम शेर खान, मोहम्मद माहिर, हैदर यार खान, कुतुबुद्दीन शेख, अलीम शेख आदि बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में अपना पूरा विश्वास जाहिर किया और कामना की कि उनकी मेहनत और प्रयास से भाजपा का शासन तत्काल समाप्त हो और मध्य प्रदेश में एक बार फिर कांग्रेस की सरकार बने, जिससे मध्य प्रदेश ही नही पुरे मुल्क में एक अच्छा संदेश जाए और मुल्क की गंगा जमनी तहजीब को बचाया जा सके।

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