राजीव भवन में आधुनिक भारत के निर्माता भारतरत्न राजीव गांधी जी की पुण्यतिथि गरिमा व सादगी से मनाई गई…..

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करीम

जगदलपुर.बस्तर जिला कांग्रेस कमेटी शहर द्वारा राजीव भवन में भारतरत्न पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी जी के बलिदान को पूरी निष्ठा व श्रद्धा के साथ आतंकवाद विरोध दिवस के रूप में मनाया गया, सर्वप्रथम उनके छाया चित्र पर कांग्रेस परिवार ने माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी।
जिलाध्यक्ष/ईविप्रा उपाध्यक्ष राजीव शर्मा ने कहा कि कुछ लोग ज़मीन पर राज करते हैं और कु्छ लोग दिलों पर। स्व राजीव गांधी एक ऐसी शख़्सियत थे, जिन्होंने ज़मीन पर ही नहीं, बल्कि दिलों पर भी हुकूमत की। वे भले ही आज इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन हमारे दिलों में आज भी ज़िंदा हैं। राजीव गांधी ने उन्नीसवीं सदी में इक्कीसवीं सदी के भारत का सपना देखा था। स्वभाव से गंभीर लेकिन आधुनिक सोच और निर्णय लेने की अद्भुत क्षमता वाले राजीव गांधी देश को दुनिया की उच्च तकनीकों से पूर्ण करना चाहते थे। वे बार-बार कहते थे कि भारत की एकता और अखंडता को बनाए रखने के साथ ही उनका अन्य बड़ा मक़सद इक्कीसवीं सदी के भारत का निर्माण है। अपने इसी सपने को साकार करने के लिए उन्होंने देश में कई क्षेत्रों में नई पहल की, जिनमें संचार क्रांति और कम्प्यूटर क्रांति, शिक्षा का प्रसार, 18 साल के युवाओं को मताधिकार, पंचायती राज आदि शामिल हैं। वे देश की कम्प्यूटर क्रांति के जनक के रूप में भी जाने जाते हैं। वे युवाओं के लोकप्रिय नेता थे। उनका भाषण सुनने के लिए लोग घंटों इंतज़ार किया करते थे। उन्होंने अपने प्रधानमंत्री काल में कई ऐसे महत्वपूर्ण फ़ैसले लिए जिसका असर देश के विकास में देखने को मिल रहा है। आज हर हाथ में दिखने वाला मोबाइल उन्हीं फ़ैसलों का नतीजा है।
अपने प्रधानमंत्री काल में राजीव गांधी ने नौकरशाही में सुधार लाने और देश की अर्थव्यवस्था के उदारीकरण के लिए कारगर क़दम उठाए, वे सियासत को भ्रष्टाचार से मुक्त करना चाहते थे।
महापौर सफीरा साहू, प्रदेश महामंत्री/एमआईसी सदस्य यशवर्धन राव सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने अपने विचार रखते हुए कहा कि 40 साल की उम्र में प्रधानमंत्री बनने वाले राजीव गांधी देश के सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्री थे और दुनिया के उन युवा राजनेताओं में से एक हैं, जिन्होंने सरकार की अगुवाई की है। उनकी मां श्रीमती इंदिरा गांधी 1966 में जब पहली बार प्रधानमंत्री बनी थीं, तब वह उनसे उम्र में 8 साल बड़ी थीं। उनके नाना पंडित जवाहरलाल नेहरू 58 साल के थे, जब उन्होंने आज़ाद भारत के पहले प्रधानमंत्री के तौर शपथ ली।
इस कार्यक्रम में प्रदेश/जिला/ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों, सेवादल, युवक कांग्रेस, महिला कांग्रेस,एनएसयूआई सहित अन्य मोर्चा/प्रकोष्ठ/विभाग के अध्यक्ष व पदाधिकारी/समन्वय समिति/सोशल मीडिया के प्रशिक्षित सदस्यों,नगर निगम/त्रि-स्तरीय पंचायत/सहकारिता क्षेत्र के सभी निर्वाचित/मनोनीत जनप्रतिनिधियों, वरिष्ठ कांग्रेसी व कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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