खेत बनाने पेड़ काटने- जलाने वाले ग्रामीणों की अब खैर नहीं

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करीम
जगदलपुर । वन अधिकार प्रपत्र प्राप्त ग्रामीण अब वनभूमि में खड़े पेड़ों को काटेंगे तो उनसे वृक्ष की कीमत के बराबर जुर्माना वसूला जाएगा अथवा उनका वनभूमि अधिकार पट्टा निरस्त किया जा सकता है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य जीवन एवं जैव विविधता संरक्षण) कार्यालय ने बस्तर के वन अधिकारियों को पत्र जारी कर उचित कार्रवाई करते हुए कृत कार्रवाई की जानकारी से नवा रायपुर कार्यालय को अवगत कराने निर्देशित किया है। विगत 10 दिसंबर 2022 को मुख्यमंत्री निवास में आयोजित छत्तीसगढ़ राज्य वन्यजीव बोर्ड की बैठक में बस्तर से बोर्ड के सदस्य हेमंत कश्यप ने मामला उठाया था कि वनांचल के लोगों को इस शर्त के साथ वन भूमि अधिकार प्रपत्र दिया गया है कि वृक्षों को काटे बगैर वन भूमि पर खेती करेगें, परंतु पट्टा प्राप्त करने के बाद ग्रामीण कायदों का पालन नहीं कर रहे हैं। वे गडलिंग कर पेड़ो को सूखाते हैं और उनमें आग लगा देते हैं। इसके चलते राजवृक्ष साल सहित कीमती वनोपज देने वाले अन्य वृक्षों की संख्या तेजी से कम हो रही है।

हेमंत कश्यप

 

विभाग द्वारा इस मामले में वांछित कारवाई नहीं की जा रही है। बैठक में सुझाव रखा गया था कि जिन ग्रामीणों को वन भूमि अधिकार प्रपत्र दिया गया है या जिन्हें अभी दिया जाना है। उनके वन अधिकार प्रपत्र में अनिवार्य रूप से इस बात का उल्लेख किया जाना चाहिए कि दी गई वन भूमि में कौन- कौन सी प्रजाति के कितने वृक्ष हैं। निश्चित अवधि में वन भूमि की जांच- पड़ताल होनी चाहिए। जिन ग्रामीणों के वन अधिकार क्षेत्र के पेड़ कटे मिले। उनका वन अधिकार प्रपत्र रद्द कर दिया जाना चाहिए अथवा जिस वृक्ष को काटा गया है उसकी कीमत के आधार पर अर्थदंड किया जाना चाहिए। तभी वन अधिकार प्रपत्र निरस्त होने अथवा जुर्माना के डर से ग्रामीण पेड़ों को नहीं काटेंगे। इस सुझाव को मुख्यमंत्री ने गंभीरता से लिया है। विगत 19 दिसंबर 2022 को मुख्यमंत्री कार्यालय ने पीसीसीएफ (वन्य जीवन एवं जैव विविधता संरक्षण) को पत्र प्रेषित किया गया था। जिसके तारतम्य में अपर मुख्य वन संरक्षक वन्यजीवन छत्तीसगढ़ ने गत 23 मई 2023 को मुख्य वन संरक्षक जगदलपुर वन वृत्त, मुख्य वन संरक्षक वन्य जीवन और क्षेत्रीय निदेशक इंद्रावती टाइगर रिजर्व जगदलपुर, निदेशक कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान जगदलपुर तथा उप निदेशक इंद्रावती टाइगर रिजर्व पत्र प्रेषित कर निर्देशित किया है कि पत्र में दर्शाए बिंदुओं पर आवश्यक कारवाई करते हुए कृत कार्रवाई से इस कार्यालय को अवगत कराएं। बताते चलें कि मार्च 2019 तक जगदलपुर वन वृत्त में 28 हजार 350 हेक्टेयर वनभूमि पर कब्जा हो चुका था। समिति की अनुशंसा पर 16754 लोगों को व्यक्तिगत तथा 694 सामूहिक वन आधिकार प्रपत्र दिया जा चुका है। बताया गया कि बीते तीन वर्षों में करीब 3000 हेक्टेयर वन भूमि पर और कब्जा कर लिया गया है। इन्हे भी वन आधिकार प्रपत्र देने की प्रक्रिया जारी है।

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