नेशनल पार्क के कायदों का मखौल, जांच होनी चाहिए

0
146

करीम
जगदलपुर, 19जून । कांगेर घाटी, राष्ट्रीय उद्यान है और जैव विविधता संरक्षण के हिसाब से राष्ट्रीय उद्यान से लकड़ी का एक टुकड़ा भी उठाना प्रतिबंधित है। वैसे भी 15 जून से 31अक्टूबर तक देश के सभी राष्ट्रीय उद्यानों को पर्यटकों के लिए बंद कर दिया जाता है। बावजूद इसके कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में 75 बाइकर्स को प्रवेश कायदे के विरुद्ध है।

बस्तर के कुछ तथाकथित विवादित और अधिकारियों के चाटुकारों को इतनी सहूलियत क्यों? नेशनल पार्क के अधिकारी इस बात का भी जवाब दें कि पार्क में लगाए कैमरों में माउस डियर (खेबड़ी) और भेड़िया (पेड्रा कोलिहा) कैद हो जाते हैं लेकिन प्रतिबंधित नेशनल पार्क में घुस पेड़ों की कटाई करने वाले ग्रामीणों की तस्वीरें इनके कैमरे में कैद क्यों नहीं होती? पार्क में लगातर पेड़ों की कटाई की शिकायत पहले भी संचालक से की जा चुकी है किन्तु कटाई थम नहीं रही है। सिर और सायकल पर लकड़ी लाते दर्जनों ग्रामीणों को नेगानर – दरभा और कोटमसर – नागलसर मार्ग पर रोज देखा जा सकता है। बस्तर में जो भी अधिकारी आते हैं। नए-नए प्रयोग करते हैं लेकिन हासिल कुछ नहीं आता। पहाड़ी मैना को ही लें। 1992 से इसके संवर्धन और संरक्षण का कार्य हो रहा है परंतु परिणाम शून्य है। अब ग्रामीण युवकों को मैना मित्र बना नया प्रयोग किया जा रहा है। अधिकारी बस्तर को प्रयोगशाला समझना बंद कर दें।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here