मतदाताओं से ड्योढ़े सुरक्षा बल

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अबूझमाड़ (बस्तर). बस्तर संभाग के नारायणपुर विधानसभा के अबूझमाड़ इलाके में एक ऐसा मतदान केन्द्र है जहां केवल 85 मतदाता है, परंतु इस मतदान केन्द्र के लिए एक सौ से अधिक अर्ध सैनिक बल के जवान तैनात हैं। पहली बार इस इलाके में 52 मतदाताओं की बढ़ोतरी भी हुई है। वहीं मतदाताओं को मतदान केन्द्र तक पहुंचने के लिए 25-30 किलोमीटर तक की दूरी तय करनी होगी।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार अबूझमाड़ में 15 हजार 330 मतदाता हैं, जिनमें 7 हजार 542 महिला मतदाता है। पूर्व में चुनाव के दौरान बहुत कम अबूझमाड़िया चुनाव में हिस्सा लेते थे परंतु इस बार अबूझमाड़ियों में मतदान करने के लिए जागरूकता आई और नक्सली बहिष्कार के चलते भी अबूझमाड़िया भी इस बार मतदान करेंगे। अबूझमाड़ के बड़े पनेड़ा के मुखिया हिड़मा मासा ने बताया कि इस बार गांव के लोग मतदान करेंगे।
बड़े पनेड़ा एक ऐसा मतदान केन्द है जहां पर 85 मतदाता है जिनमें 44 महिला वहीं पालमेटा में 99 मतदाता है जिनमें 52 महिलाएं हंै। इन मतदाता केन्द्रों पर सौ से अधिक सैनिक बल आधुनिक हथियारों सहित तैनात हैं क्योंकि अबूझमाड़ इलाका अत्यंत संवेदनशील है, इस इलाके में नौ मतदान केन्द्रों को बीजापुर जिले के भैरमगढ़ तहसील में स्थानांतरण किया गया है, इन नौ मतदान केन्द्रों में मतदाताओं को मतदान करने के लिए नदी पार करके 25 से 30 किलोमीटर आना होगा।
नारायणपुर विधानसभा क्षेत्र में एक लाख नब्बे हजार छः सौ बहत्तर मतदाता है जिनमें अंठानबे हजार छः सौ तिरानबे महिला मतदाता हैं। 265 मतदान केन्द्र बनाये गये हैं जिनमें से अधिकांश अतिसंवेदनशील इलाके में आते हंै।
अबूझमाड़ क्षेत्र को अबूझ इसलिए कहा गया है कि क्योंकि यहां की बीहड़ता और बियाबान जंगल नारायणपुर, बस्तर, बीजापुर एवं दंतेवाड़ा जिलों के उत्तर-पश्चिम से लेकर दक्षिण-पश्चिम तक फैला हुआ है स्थिति यह है कि स्वतं़़त्रता के 75 वर्षों में भी इस क्षेत्र का भौगोलिक सर्वेक्षण अबतक पूरा नहीं हो पाया है। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में पहली बार इस क्षेत्र के हवाई सर्वेक्षण की प्रक्रिया प्रारंभ एवं पूर्ण की गई और अब भौगोलिक सर्वेक्षण को अंजाम दिया जा रहा है। प्रकृति एवं पर्यावरण विद् डाॅ. सतीश के अनुसार कुल लगभग 3900 वर्गकिलोमीटर के क्षेत्र में फैला यह क्षेत्र आज भी आमजनों के लिए अनजाना ही है। यहां की भौगोलिक स्थिति यहां के रहवासियों (आदिवासी) की संस्कृति सोच और रहन-सहन आज भी हमारी आदिम संस्कृति की झलक दिखा जाती है। कहना न होगा कि अपनी दुर्गम स्थिति-परिस्थिति के चलते यह ंक्षेत्र नक्सलियों का अघोषित गढ़ रहते हुए अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्र है। इसी के चलते मतदान केन्द्रों में और उसके आसपास के क्षत्रों में सुरक्षा सुनिश्चित करने के आशय से भारी सुरक्षा बल की तैनाती हर चुनाव में करना पहली जरूरत बन चुकी है।

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