क्रिकेट का ऐसा जुनून कि बना डाला अंतर्राष्ट्रीय स्तर का स्टेडियम

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करीम

जगदलपुर, 23  अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैदान के मापदंड के अनुरूप बस्तर जिला मुख्यालय से महज 5 किमी दूर ग्राम कालीपुर में अंतर्राष्ट्रीय स्तर का स्टेडियम का विधिवत पूजा अर्चना के साथ शुभारंभ किया गया.गोंचा रथयात्रा पर्व के मौके पर गाँव के पुजारी ने किया. कालीपुर गांव के निवासी प्रदीप गुहा को क्रिकेट का ऐसा जुनून है कि उन्होंने अपने 4 एकड़ के खेत को मैदान का रूप दे दिया.जहां टर्फ विकेट बनाने के लिए राजस्थान और रायपुर से मिट्टी मंगवाए गए और छत्तीसगढ़ क्रिकेट संघ के एक्सपर्ट की देखरेख में विकेट बनाया गया.प्रदीप गुहा ने बताया कि स्टेडियम में ही रेसिडेंसियल क्रिकेट अकादमी तैयार किया गया है, जहां बस्तर के दूर-दराज के क्रिकेट खिलाड़ी यहां रहकर अपनी प्रतिमा को निखार कर सकते हैं. अभी सुकमा क्षेत्र के 10 बच्चे हॉस्टल में रह रहे हैं. वहीं लगभग 50 बच्चे रोजाना अभ्यास करते हैं.उन्होंने बताया कि मात्र 1500 रूपये महीने का फीस लिया जा रहा है, जिसमें क्रिकेट सामान उन्हें देते हैं और यदि कोई आर्थिक रूप से गरीब बच्चा है और जिसमें क्रिकेट खेलने की प्रतिभा है उसे फ्री में जूते, जर्सी और हॉस्टल-भोजन सब कुछ दिया जाता है.उन्होंने बताया कि हॉस्टल में रहने वाले बच्चे किसी भी समय मैदान में अभ्यास कर सकते हैं, उन्हें सिखाने के लिए बीसीसीआई लेबल का रजिस्टर्ड कोच है.जो सुबह शाम निर्धारित समय में बच्चे से लेकर युवक तक क्रिकेट खिलाड़यिों को बेटिंग, बॉलिंग, फिल्डिंग समेत क्रिकेट के मंजे हुए खिलाड़ी बनने के गुर सिखा रहे है.जिसे अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी मैच में अपनाते हैं, वह सारी व्यवस्थाएं इस मैदान में उपलब्ध कराई गई है.कोलकाता के ईडन गार्डन मैदान की तरह कालीपुर का क्रिकेट मैदान पूरी तरह हरे घास से भरा हुआ है.गांव के खेत की भूमि को मैदान का रूप देने के लिए 3 साल तक की गई मेहनत रंग लाई.उबड़ खाबड़ खेती जमीन को क्रिकेट का मैदान बनाने के लिए. सैंकड़ों ट्रक मिट्टी का उपयोग किया गया. मैदान को समतल करने के लिए उन्होंने महाराष्ट्र से 4 रोलर मंगवाए, वहीं विदेशी कंपनी का ड्रिप सिस्टम से पूरे मैदान के 4 एकड़ जमीन पर पानी का छिड़काव -किया गया। ग्रास कटर मशीन भी बाहर से मंगवाया गया है। रायपुर का अंतर्राष्ट्रीय परसदा का क्रिकेट ग्राउंड के बाद कालीपुर का यह क्रिकेट ग्राउंड, अंतर्राष्ट्रीय मैच के स्तर का बन सका है.

प्रदीप बचपन से खेल रहें क्रिकेट – बेटे को भी बनाया क्रिकेटर

क्रिकेट के पागलपन और जुनून पर प्रदीप गुहा ने गुड न्यूज़ टुडे बातचीत की, तो उन्होंने कहा कि क्रिकेट खेलने का बचपन से ही शौक था, लेकिन यहां किसी तरह की सुविधा या मार्गदर्शन नहीं मिलने से क्रिकेट में आगे बढ़ने का अवसर नहीं मिल सका.मैं अपने बेटे और बेटी में लाने का प्रयास किया.गांव में ही बच्चों को खिलाते हुए हर उस मैच में ले जाता था, जहां देखकर बच्चे खिलाड़ी बनने के सपने को परवान चढ़ा सके.बेटी को लड़कों के साथ मैच खेलते हुए देखकर लोग टीका टिप्पणी भी करते रहे, लेकिन मेरी सोच- थी मैं अच्छा खिलाड़ी नहीं बन सका तो क्या हुआ, बच्चों को आगे बढ़ाउंगा, उसके लिए बच्चों को देश और कई महानगरों में ले जाकर भारतीय टीम के नामी खिलाड़यिों के संस्थानों में मोटी फीस देकर दाखिला दिलवाया.अभी बेटा अंडर 16 में स्टेट टीम में खेल रहा है और बेटी मेरी पत्नी की इच्छा के अनुरूप एमबीबीएस में दाखिला ले चुकी है.उन्होंने कहा मेरा क्रिकेट के प्रति जुनून कम नहीं हुआ है आज भी वेटरन क्रिकेट खिलाड़यों में शामिल हूं.हाल ही में रायपुर में हुए वेटरन खिलाड़यिों के दो मैच में 4 विकेट चटकाया.मेरा छत्तीसगढ़ में वेटरन खिलाड़यिों के प्रदर्शन में 9वां स्थान है.बहरहाल गांव में स्टेडियम बनाने का उद्देश्य बस्तर के खिलाड़यिों को भारतीय टीम का खिलाड़ी बनाना और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के मैच तक
पहुंचाना है.

फल्ड लाइट और एलईडी सुविधा

फल्ड लाइट और एलईडी सुविधा: प्रदीप गुहा ने बताया कि रात में भी मैच हो सके, इसलिए फल्ड लाइट की सुविधा पर काम चल रहा है, वह भी अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैदान के मानक स्तर का होगा.साथ ही एलईडी भी लगेगा जिसमें रन आउट होने के बाद खिलाड़ी अपने पिछले एक्शन को देख सकेंगे कुल मिलाकर कालीपुर का यह अंतर्राष्ट्रीय स्टेडियम एक व्यक्ति के जुनून के साथ तैयार हुआ है.जिसे देखकर कोलकाता का ईडन गार्डन कहना उचित होगा. वे कहते हैं 65 मीटर का बाउंड्रीवाल है, जहां तक महेन्द्र सिंह धोनी चौका-छक्का मारते हैं, इसका मतलब है अंतर्राष्ट्रीय मैच वाले देश के क्रिकेट मैदानों के बराबर कालीपुर के इस मैदान में मापदंड के अनुसार काम किया गया है.

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