कांगेर वैली में शोधकर्ताओं का बढ़ता रुझान

0
102

जगदलपुर , 23 नवम्बर बस्तर जिले का कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान जैव – विविधता से परिपूर्ण क्षेत्र है जो अपने प्राकृतिक सौंदर्य , रोमांचक गुफाओं ,जैव – विवधता और स्थानीय आदिवासी संस्कृति के लिए देश – विदेश में विख्यात है | इसी के चलते यहाँ अनुसंधान के भी अपार संभावनाएं हैं| शुरुआत से ही यहां विभिन्न अनुसंधान केन्द्रों व संस्थाओं द्वारा शोध कार्य होते आये हैं किन्तु वर्तमान में पी.एच्.डी. शोधकर्ताओं व विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा अधीक संख्या में शोध कार्य हेतु कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान लैंडस्केप का चुनाव अध्ययन क्षेत्र के लिए किया जा रहा हैं| वर्तमान में 12 शोधकर्ताओं द्वारा राष्ट्रीय उद्यान में अध्ययन कार्य किये जा रहे हैं। जिसमें तितलियों की विविधता, मगरमच्छों का रहवास ,पहाड़ी मैना रहवास व व्यवहार, औषधीय पौधों की विविधता ,वानस्पतिक विविधता, बायोमॉस व कार्बन स्टॉक और पारिस्थितिक पर्यटन का प्रभाव विषयों पर अध्ययन कार्य किये जा रहें हैं | इन अध्ययन विषयो से यंहा की विषेश जैव – विविधता को अच्छे तरह से जानने और पेड़-पौधें , जीव -जंतु के संरक्षण व विकास के लिए प्रबंधन योजना में मदद मिल रही है। अध्ययन हेतु स्थानीय ही नहीं अपितु दुसरे राज्य से भी शोधकर्ता आ रहें हैं । इन शोधकर्ताओं द्वारा स्थानीय लोगों को भी यहाँ की विविधताओं के बारे में प्रशिक्षित किया जा रहा हैं| जिससे स्थानीय युवायें प्रकृतिक मार्गदर्शक के रुप में उभर रहें हैं तथा जैव – विविधता संरक्षण में अपना योगदान दे रहें हैं। राष्ट्रीय उद्यान के निदेशक श्री धम्मशील गणवीर ने बताया कि बस्तर क्षेत्र और विशेषकर कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान का लैंडस्केप शोधकर्ताओं के लिए हॉटस्पॉट के रूप में उभर रहा है। इन सभी शोध कार्यों से भविष्य में बस्तर की प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण , संवर्द्धन और प्रबंधन में मदद मिलेगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here