कांगेर घाटी की अजब है तासीर

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करीम

जगदपुर, 23 जून। कांगेर बाली नेशनल पार्क की गुफाओं में सैलानियों के लिए विभिन्न प्रकार के आकर्षण साबित हो रहे हैं। इन दिनों का पूरा मैदान और वाराणसी का अधिकतम तापमान 44 से 46 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है, वहीं कोटमसर सहित दण्डक और दूसरी गहरी गुफाओं में अधिकतम तापमान 22 से 24 डिग्री के बीच बना हुआ है। इन गुफाओं को देखने वाले दर्शकों में शामिल हैं अमेरिका के ट्यूसटन निवासी शहर इंजीनियर क्लिंटन ने अपने अहसास से बताया कि गुफा में घूमकर गुफा से बाहर और अंदर के तापमान में कम से कम 10 से 15 डिग्री तक का अंतर महसूस होता है, गुफा से बाहर आने पर ऐसा महसूस होता है कि हम धूप में गाड़ी से बाहर निकलकर लू के थपेड़े खा रहे हैं।

गुफा के इस वातानुकूलन का सिस्टम पूरी तरह से कुदरती है। गुफाओं के आसपास की हरी-भरी हरियाली तो गुफाओं के भीतर भी मिलती है। गुफाओं के ईद-गिर्द भूमिगत जल की भी कमी नहीं। गुफा में पाए जाने वाले को भी मिलता है इस खिलौने का फ़ायदा। कांगेर वैली नेशनल पार्क की निचली गुफाओं को 1956 के आसपास करने का श्रेय डॉ. शंकर तिवारी को जाता है। इसके बाद
कैलास, दंडक, मदारकोटा, झुमरी आदि गुफाओं के मुहानों की खोज की गई जिसके बाद यह शैल थाम सा गया है। स्टैलेग्माइट और स्टैलेग्मेटाइट की करोड़ों साल पुरानी प्रजाति को हर साल देश-विदेश और प्रदेश से लाखों लोग देखते हैं

सैलानी आते हैं। सामान्यतया देखने की अवधि 1 नवंबर से 15 जून के बीच होती है पर बहस के सक्रियता के साथ-साथ बढ़ती भी है। इस सीज़न में 30 जून तक गुफाएँ खोदे गए हैं।
आजकल देश के कई अन्य आदर्शों की तरह छत्तीसगढ़ में गर्मी पैदा हो रही है। राज्य के किसी भी हिल स्टेशन पर जाएं तो सिर्फ पांच-छह बात डिग्री पर मिलेगी राहत। दो दिन पहले की बात करें तो वाराणसी क्षेत्र के जगदलपुर में 38 डिग्री, बैलाडीला में 34 डिग्री, कांकेर में 37 डिग्री, पाट में 36 डिग्री सेल्सियस, चिल्फी में 37 डिग्री, चिरमिरी में 38 डिग्री, अंबिकापुर में 38 डिग्री, पेंड्रारोड में 38 डिग्री सेल्सियस, रह रहा है. संभवतः हो मैनपाट, चिरमिरी, बैलाडीला, कांकेर में आदि ठंड के दिनों में तापमान दहाई अंक से नीचे चला जाता है। मैनपाट और चिल्फ़ी घाटी में ठंड 3-134 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाती है और बर्फ की चादर भी जमीन पर दिखाई देती है। धीरे-धीरे औसत तापमान में वृद्धि जारी है।

धम्मशील गणवीर, लीडर ने बताया कि ताप्ती गर्मी के मई-जून में भी गुफाओं में तापमान नियंत्रित रहता है कि हमें कुदरती एसी के रूप में माना जा सकता है जो बिना बिजली और बिना किसी अतिरिक्त खर्च के महसूस किया जा सकता है।

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