ग्रामीणों द्वारा नक्सलियों का विरोध कर लोकतंत्र में हिस्सा लेने आतूर  

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करीम
जगदलपुर, 15 अक्टूबर। बस्तर संभाग के अति सवेंदनशील इलाके के आदिवासी अपने गांव में मतदान केन्द्र खोलने के लिए जिला प्रशासन पर दबाव डाल रहें है ताकि वे नक्सली बहिष्कार के चलते उनके विरोध में लोकतंत्र में हिस्सा लेकर अपने मत का उपयोग करें। हालांकि हर चुनाव में नक्सली चुनाव का बहिष्कार करते है और इसका असर भी देखने को मिला, अब इस बार ग्रामिण नक्सलियों का विरोध कर रहें है वोट डालने के लिए।
सुकमा जिले के 06 गांव के करीब 6000 मतदाता ग्रामिणों का कहना है कि आदिवासी लोकतंत्र में बड़चड कर हिस्सा लेने चाहते है। नक्सली दहसत के चलते मतदान करने कई किलोमिटर दूर जाना पड़ता है इस कारण इस इलाके के मतदाता अपना अधिकार का उपयोग नहीं कर पा रहे है कई चुनावों मे मतदाता मतदान नहीं कर पा रहें है। आज इस विधान सभा चुनाव में ग्रामिण इस चुनाव में नक्सलियों के विरोध के बावजूद मतदान करने के लिए जिला कलेक्टर को आवेदन दिया। इसी तरह दक्षिण बस्तर के कई अतिसंवेदनशील इलाके के ग्रामीण भी नक्सलियों का विरोध कर रहे है। हालांकि ग्राम गोंदपल्ली, गोंडोरास और डूब्बा के ग्राम प्रमुख पांडूराम ने आरोप लगाया कि मतदान केन्द्रों को अतिसंवेदनशील बताते हुए स्थानीय पुलिस के तरफ से माओवाद का डर दिखाकर वोट देने से वंचित किया जा रहा है।
श्री सुंदरराज पी ने बताया कि उपरोक्त नवीन सुरक्षा कैम्पों की स्थान के फलस्वरूप आगामी विधान सभा चुनाव के दौरान 126 अतिरिक्त मतदान केन्द्र जो पूर्व में नक्सल समस्या के कारण से अन्य स्थान पर स्थानान्तरित किया गया, उन्हें पुनः स्थापित किया जाकर अधिक से अधिक नागरिकों को मतदान करने के संवैधानिक अधिकार प्रदाय करने का पहल स्थानीय प्रशासन एवं पुलिस द्वारा की जा रही है।
उन्होंने बताया कि बस्तर संभाग के स्थानीय प्रशासन, पुलिस एवं सुरक्षा बलों के द्वारा आगामी विधान सभा चुनाव 2023 की समस्त प्रक्रियाओं को व्यवस्थित एवं सुरक्षित तरीके से सम्पन्न करने हेतु आवश्यक तैयारी की जा रही है।
126 मतदान केन्द्र जो तब्दील किए जा रहे हैं जिसमें से अधिक मतदान केन्द्र 22 कोंटा विधानसभा क्षेत्र का है, और सबसे कम 1 बस्तर विधानसभा क्षेत्र का है।

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