विश्व की तीसरी सबसे बड़ी गणेश की प्रतिमा  बारसूर में

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temple in chhattisgarh

करीम
जगदलपुर, 20 सितमबर। इन दिनों भारत में गणेश चतुर्थी का पर्व चल रहा है। इस अवसर पर देवनगरी बारसूर में गणेश की युगल प्रतिमा का दर्शन करने लोगों का तांता लगा हुआ है। बस्तर में छिन्दक नागवंश के काल की गणेश प्रतिमाओं में से एक युगल गणेश अथवा गणेश द्वय की प्रतिमा स्थापित है । इन प्रतिमाओं को एक मंडप के नीचे व्यवस्थित किया गया है । यह विश्व की ज्ञात तीसरी सबसे बड़े गणेश होने का गौरव प्राप्त है । इन दिनों इस प्रतिमा का दर्शन करने देश-विदेश से ही नहीं वरन भारत के कोने-कोने से लोग आते हैं। इस मंदिर के समीप ही किसी प्राचीन मंदिर का भग्नावशेष दिखाई पड़ता है, संभवत उक्त स्थान पर किसी देवी देवताओं का प्राचीन मंदिर अवस्थित रहा हो, चूंकि समीप ही गणेश द्वय को मंडप के नीचे रखा गया है। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि इन मंडप में रखे गए युगल प्रतिमा कभी उक्त मंदिर में स्थापित रही हो । गणेश द्वय की प्रतिमा विशालकाय तथा चतुर्भुजी है इसके साथ ही एक गणेश की प्रतिमा पहले की अपेक्षा छोटी है छोटे गणेश की प्रतिमा आंशिक रूप से खंडित है ।
बस्तर के जाने-माने लेखक व इतिहासकार रूद्रनारायण पाणीग्राही ने बताया कि पुरातत्वविदों के अनुसार बारसूर में स्थित गणेश, बस्तर अंचल की सबसे आकार के होने का गौरव प्राप्त है, जो एक ही पत्थर से बनाई गई प्रतिमा है । इस कला को मोनोलिथिक कहा जाता है अर्थात बिना पत्थर को काटे-छाटें और बिना जोड-तोड़, बनाने की कला को मोनोलिथिक कहा जाता है । एक ही मंदिर में जुड़वा अष्टविनायक की प्रतिमाओं का होना अपने आप में दुर्लभ है। प्रतिमाओं का निर्माण बलुआ पत्थर से किया गया है, उक्त गणेश प्रतिमा की लंबाई 230 सेंटीमीटर, चैड़ाई 190 सेंटीमीटर, तथा मोटाई 130 सेंटीमीटर है। प्रतिमा की ऊंचाई लगभग 8 फीट है । दूसरी प्रतिमा की लंबाई 160 सेंटीमीटर, चैड़ाई 100 सेंटीमीटर, तथा मोटाई 75 सेंटीमीटर है, ऊंचाई 5 फिट है। प्रतिमा के ऊपरी दाहिने हाथ में पशु निकले हाथ में टंक, ऊपरी बाएं हाथ में सर्प, तथा निचले हाथ में मोदक धारण किए हुए हैं । गणेश जी यज्ञोंपवित्र धारण किए हुए हैं तथा कंकण तथा पादवलय धारण किए हुए हैं। आसन के सामने मुषकराज विराजे हुए हैं।

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