देशी मदिरा का बाजार सजता है, दशहरा पर्व में

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जगदलपुर 26 अक्टूबर . विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा पर्व अंतिम चरणों की ओर है, इस पर्व में इन दिनों देशी- विदेशी पर्यटकों का भारी जमावाड़ा है । सारे विधानों को बड़े गौर से निहारते विदेशी पर्यटकों को देखा जा सकता है। भीतर रयनी तथा बाहर रयनी के विधानों के साथ ग्रामीण परिवेश का बाजार शहर के हृदय स्थल सिरहासार तथा राजमहल के सामने सजी हुई है, जिसमें शहरी खरीदारों की भीड़ देखी जा सकती है। इस बाजार में वाद्य यंत्रों, घढ़वा शिल्प, औजार, देवी- देवताओं के वस्त्र से लेकर ग्रामीण परिवेश के व्यंजनों का बाजार सजा हुआ देखा जा सकता है। अनेक विधानों और विभिन्न रस्मों के साथ शहर के वन विभाग कार्यालय परिसर में देसी शराब का बाजार सजता है, जहां आसवन विधि से महुआ से बनी देसी शराब विक्रय किया जाता है। इस शराब के छोटे से बाजार को स्थानीय लोक भाषा में “मंद पसरा” कहा जाता है । यह बाजार पिछले कई दशकों से वन विभाग के कार्यालय परिसर में लगता आ रहा है । इस बाजार में किलेपाल, दरभा, छिंदावाड़ा, बास्तानार, डिलमिली आदि अनेक गांवों से आये महिलाओं तथा पुरुषों के द्वारा शराब विक्रय करते देखा जा सकता है, साथ ही यहां चखना बाजार भी सजता है। यह बाजार दशहरा के अंतिम दिनों में तीन से चार दिनों तक भरता है। बस्तर के ग्रामीण परिवेश में शराब पीना तथा पिलाना दिनचर्या में शामिल है। विभिन्न अंचलों में बसने वाले परिवारों के साथ पर्व में मेल मुलाकातों के दौरान सुख-दुख के बातों के साथ आथित्य सत्कार का जरिया होता है, यह शराब । देवी-देवताओं को पूजा के दौरान मदिरा अर्पण भी ग्रामीणों की संस्कृति का एक हिस्सा है। मदिरा के बाजार में इस अवसर पर ग्रामीणों के साथ-साथ शहरी मदिरा प्रेमियों को भी इस छोटे से बाजार में देखा जा सकता है। इस अवसर पर कोई रोक-टोक नहीं होती और ना ही कोई अप्रिय घटना।

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