दलपत सागर सफाई अभियान में आई तेजी – महापौर आयुक्त भी बने अभियान का हिस्सा

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करीम

जगदलपुर: बस्तर मुख्यालय के लोगों ने छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े तालाब की सफाई करने के लिए एक बार फिर अभियान छेड़ रखा है.22 अप्रैल 2023 से शुरू हुए दलपत अभियान के दुसरे चरण में लगातार तालाब की सफाई की जा रही है.यह तालाब सालों से उपेक्षित में पड़ी थी 5 नवंबर 2019 से 26 जनवरी 2020 तक 90 दिन दलपत सागर बचाओ अभियान के सदस्यों ने नगरवासियों के सहयोग से  बड़ा आन्दोलन छेड़ा था तब प्रशासन जागा और तलाब के सौंदर्यीकरण किया गया परन्तु पुनः तालाब  गन्दा होने लगा जिसे देख दलपत सागर बचाओ अभियान के सदस्य विचलित हो गये और बैठक कर पुनः सफाई अभियान प्रारंभ करने का निर्णय लिया है.अभियान के सदस्यों ने सफ्ताह के दो दिन शनिवार और रविवार को दलपत में श्रमदान कर रहें है.प्रत्येक शनिवार रविवार को अभियान के सदस्य सुबह 7 बजे इकट्टा होते है और तालाब में फेलें जलकुम्भी, घास आदि को बाहरनिकाला जा रहा है .तालाब में बड़ी संख्या में लोगों के द्वारा फेंकें गये शराब की बोतलें,झिल्ली पन्नी,दवाई कीशीशियाँ प्लास्टी बोतलें बाहर निकाल रहें है,अभी भी बड़ी संख्या में जल को दूषित करने वाली सामग्री लोग तलाब में फेंक रहें है.शहर के लोगों ने इस तालाब को वापस मूल स्वरूप में लाने के लिए एक वृहद अभियान की  थी जो फलीभूत होती नजर नही आ रही  है. यही वजह है की एक बार फिर अभियान की शुरुवात शनिवार रविवार सुबह 7 बजे से 9 बजे तक नगरवासी तालाब में फैली गंदगी और जलकुम्भियों को बाहर निकालने में जुटे हैं. एकजुटता का ही नतीजा है कि तालाब बड़ी तादाद में कचरा खरपतवार बाहर निकाला जा रहा है.

महापौर आयुक्त भी शामिल हुए अभियान में

रविवार को महापौर सफिरा साहू,निगम आयुक्त के.एस पैकरा पार्षद ललिता राव भी अभियान में शामिल हुये और अभियान के सदस्यों के साथ सफाई करने में जुटे.इस दौरान महापौर ने कहा की दलपत सागर हमारी धरोहर है उसे बचाने की जिम्मेदारी भी हम सब की है.नगर की जनता ने जो बीड़ा उठाया है तारीफे काबिल है.नगर निगम जगदलपुर तालाब की सफाई के लिए संकल्पित है. निगम आयुक्त ने कहा की तालाब की सफाई के लिये ई बॉल मंगाया है प्रायोगिक तौर पर इसका इस्तेमाल कर देखा जाएगा सफलता मिलने पर पुरे तालाब में ई बॉल डाल कर जलकुम्भियों को नष्ट किया जाएगा दलपत सागर बचाओ अभियान के दल प्रमुख अनिललुंकड ने कहा की 3 वर्ष पहले दलपत सागर बचाओ अभियान के सदस्यों ने सफाई का बीड़ाउठाया था उसके बाद निगम प्रशासन जागा.से और सौंदर्यीकरण हुआ लेकिन दलपत का सिर्फ सौंदर्यीकरण हुआ है वह उपरी तौर पर वास्तव में आज भी दलपतसागर खतरे में है.मूल समस्या का समाधान आज तक नही हो पाया.इसीलिए अभियान के सदस्योंने पुनः सफाई का जिम्मा उठाया है.जहाँ जहाँ बिड हार्वेस्टिंग मशीन नही जा सकती वहावहा अभियान के सदस्य सफाई कर रहें है.सफाई अभियान के दौरान दल प्रमुख अनिल लुक्कड़,दिनेश सराफ,डॉ प्रदीप पांडे,अनिल अग्रवाल,कलविंदर सिंह,विधुशेखर झा,शिव रतन खत्री,रोशन झा,रामनरेश पांडे,रतन व्यास,लखन लाल साहू जी,दीपक श्रीवास्तव ,धीरज कश्यप,राजीव निगम,मनीष मूलचंदानी,जयंत राव,सुलाता महाराणा,स्वाति पाठक,अंकित केसरी सहित अन्य श्रमदानी मौजूद रहें.

 

दलपत सागर का इतिहास

दलपत सागर के इतिहास पर एक नजर दौड़ाईजाए, तो सन 1772 में राजा दलपत देव ने इस तालाब दलपत सागर का इतिहासलगभग 400 साल पहले बस्तर रियासत के महाराजा दलपतदेव ने इस तलाब का निर्माणसिंचाई और निस्तारी के लिये किया था. ग्राम मधोता से 1772 में राजधानी जगदलपुर शहर में शिफ्ट किया गया था. उसी दौरानराजा ने इस विशाल तालाब का निर्माण करवाया. आगे जाकर यह तालाब दलपत सागर के नाम सेप्रसिद्ध हुआ. यह तालाब प्रदेश में यह सबसे बड़े तालाबों में गिना जाता है. बतायाजाता है कि रियासतकालीन दौर में 50 से अधिकतालाब जल संग्रहण के लिये बनाये गये. उस दौर में जल संचय के लिये बेहतर कार्य कियेजाते थे. परंतु वक्त के साथ साथ तालाबों की स्थिति दयनीय होती चली गई और आज यहस्थिति है कि आधे से ज्यादा तालाब और कुंए विलुप्त हो चुके हैं. उनमें कब्जा करक्रंकीट का जंगल बना दिया गया है. अब कुछ ऐसेतलाब ही बचे हैं,जो बस्तर की धरोहर हैं. उन्ही मेंसे एक बड़े तलाब को संरक्षित करने का जिम्मा उठाया है दलपत सागर बचाओ जनजगरण अभियानके सदस्यों ने. अभियान से जुड़े सदस्यों की मानें तो, तालाब को पूरी तरह साफ करने का काम आसान नही है, जब तक शासन प्रशासन का सहयोग प्राप्त ना हो. मगर अभियान केमाध्यम से साफ सफाई लगातार करने से कम से कम तलाब के किनारे फेंके गये कचरों को तोबाहर निकाला ही जा सकता है और शासन का ध्यान इस और आकर्षित किया जा सके.

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