चांदामेटा में आत्म समर्पित ,सज़ा याफ़्ता नक्सली वोट डालेंगे

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करीम
जगदलपुर 19 अक्टूबर . 2023 का चुनाव दरभा ब्लॉक में घने जंगलों के बीच स्थित चंदा मेटा गांव के लिए वरदान बनकार सामने आ रहा है। इस गांव में अपने पहले मतदान केंद्र और चुनावी प्रक्रिया में ग्रामीणों की प्रारंभिक भागीदारी पहली बार होने जा रही है। इस महत्वपूर्ण विकास ने चंदा मेटा में निवासियों के जीवन को बदल दिया है, जो इस क्षेत्र में एक सकारात्मक बदलाव का प्रतीक है। कुछ समय पहले तक, चंदा मेटा में गांव के बच्चों के लिए स्कूल भवन भी नहीं था जो अब शुरू किया गया है ।नवनिर्मित स्कूल भवन न केवल एक शैक्षणिक संस्थान के रूप में काम करेगा बल्कि अब एक मतदान केंद्र के रूप में भी काम करेगा। यह परिवर्तन तब शुरू हुआ जब ग्रामीणों ने मतदान केन्द्र की मांग की थी। इसके अलावा, चंदा मेटा लंबे समय से नक्सली प्रभाव में था इस गांव में आज भी प्रत्येक घर से नक्सली मामलों की सजा पा चुका एक व्यक्ति जरूर मिलता है। , तुलसी डांगरी के नाम से मशहूर पहाड़ी को पहले नक्सलियों का गढ़ माना जाता था। गाँव में नक्सली उपस्थिति का इतिहास था, और यह माना जाता था कि प्रत्येक घर का कम से कम एक सदस्य इस आंदोलन से जुड़ा हुआ था। नक्सली समस्या से निपटने और सुरक्षा बढ़ाने के लिए,पुलिस प्रशासन ने गांव में कैंप स्थापित किए, जिससे क्षेत्र में नक्सलियों की पकड़ कम होती गई े। इस महत्वपूर्ण विकास के बाद, निवासियों की अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग करने की इच्छा स्पष्ट हो गई। परिणामस्वरूप, स्थानीय प्रशासन ने ग्रामीणों की बात सुनी और पहली बार गांव में मतदान केंद्र शुरू करने का ऐतिहासिक कदम उठाया। मतदान केंद्र का जुड़ना चंदा मेटा के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, क्योंकि यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया में उनके बढ़ते एकीकरण का प्रतीक है। पहले, गाँव के बच्चों को शिक्षा के लिए दूर-दराज के गाँवों में जाना पड़ता था, लेकिन नए स्कूल भवन के निर्माण से उनके लिए शिक्षा अधिक सुलभ और सुविधाजनक हो जाएगी। चुनावी प्रक्रिया में चंदा मेटा की प्रारंभिक भागीदारी क्षेत्र में एक सकारात्मक परिवर्तन का प्रतीक है और ग्रामीणों के लिए नई आशा लेकर आई है। यह ऐतिहासिक विकास उन चुनौतियों पर जीत का प्रतिनिधित्व करता है जिनका गांव ने सामना किया है, और यह देश के सबसे दूरस्थ और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी लोकतंत्र के महत्व को रेखांकित करता है। इस गांव में 700 परिवार है। और 328 मतदाता हैं। प्रत्येक घर से नक्सली सजायाफ्ता होने के कारण हर परिवार में एक नक्सली हुआ करता था। नौ बच्चों का पिता आत्मसमर्पित नक्सली है। वह भी मतदान में हिस्सा लेगा। इस अभूतपूर्व चुनाव में सुरक्षा के मद्देनजर 5000 पुलिस कर्मी पूरे क्षेत्र में तैनात रहेंगे।

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