डीएच बीजापुर, उत्सव के डॉक्टरों ने अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग करके मरीज की बचाई जान

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करीम

बीजापुर.  नवीना कुडियाम चिन्नकवाली (मरीज) पेट में दर्द के साथ आया था, पेट में 2 लीटर रक्त के संग्रह के साथ अस्थानिक गर्भावस्था का निदान किया गया था। समय पर निदान और उपचार के बाद ऑटोट्रांसफ्यूजन के साथ तत्काल सर्जरी (Exploratory laprotomy with salpingectomy with drainage of hemoperitoneum with autotransfusion) द्वारा इस युवती की जान बचाई गई। इस तकनीक के इस्तेमाल के कारण खून की कमी के बावजूद इस तरह की कठिन सर्जरी का प्रबंधन किया गया।
इस रोगी का प्रबंधन डीएच – उत्सव में स्त्री रोग विशेषज्ञों की टीम (डॉ. सचिन, डॉ. गणेश, डॉ. सुषमा), साथ ही एनेस्थेटिस्ट (डॉ. अमरेंद्र और डॉ. सुधाकर), रेडियोलॉजिस्ट (डॉ. स्वप्निल), पैथोलॉजिस्ट (डॉ. समीरानंदन) द्वारा किया गया। ऐसे गंभीर रोगियों में एनेस्थीसिया देना मुश्किल होता है, लेकिन एनेस्थेटिस्ट द्वारा इसे प्रभावी ढंग से संभाला गया। लेबर वार्ड और गायनेक ऑपरेशन थियेटर में नर्सिंग स्टाफ द्वारा रोगी की अच्छी देखभाल की गई। इस तरह के कठिन मामले के प्रबंधन में सिविल सर्जन डॉ वाई एस ध्रुव की भूमिका महत्वपूर्ण थी।
ऐसी सर्जरी आमतौर पर बड़े अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में ही की जाती हैं। डीएच बीजापुर में इस तरह के कठिन ऑपरेशन होने के कारण मरीजों को इलाज के लिए बड़े अस्पतालों के चक्कर नहीं काटने पड़ते।

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