बस्तर दशहरा: रथ निर्माण की सजा

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जगदलपुर, 19 अक्टूबर। बस्तर दशहरा में विशालकाय रथ आकर्षण का केंद्र होता है, ऐतिहासिक बस्तर में दशहरा पर्व के अवसर पर प्रतिवर्ष एक विशालकाय रथ निर्माण किया जाता है, यहां रथ के निर्माण करने वालों की रूढ़िवादिता के चलते कारीगरों को अपने ही समाज से दंडित किया जाता है और जुर्माने की राशि अदायगी के बाद पुनः जाति में सम्मिलित किया जाता है। इस तरह की गलती एक बार अथवा भूलवश नहीं बल्कि पिछले एक दशक से भी अधिक वर्षों से चल रहा है। पिछले कई वर्षों से रथ बनाने वाले प्रतिवर्ष अपने गांव के सामाजिक पंचायत में लगभग 2000 ₹ का आर्थिक दंड भरते हुए आ रहे हैं।
बस्तर के जाने माने इतिहासकार रूद्रनारायण पाणीग्राही ने बताया कि वस्तुतः रियासत काल से ही रथ बनाने की जिम्मेदारी अंचल के संवरा समाज को सौंपा गया था। लगभग 600 वर्षों से अधिक बस्तर दशहरा की परंपराएं किसी न किसी रूप में आज भी विद्यमान है । बस्तर के प्रत्येक जाति तथा अनुसूचित जाति के लोगों को तथा ग्रामीणों को अलग-अलग कार्य सौंपा गया है। इसी क्रम में झारउमर गांव तथा बेड़ा उमरगांव के सँवरा समाज के लोगों को रथ निर्माण का कार्य सौंपा गया था ।
धीरे-धीरे संवरा समाज के लोगों की उदासीनता के चलते गिने-चुने लोग ही रथ निर्माण के लिए पहुंचने लगे, जिससे निर्माण की प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न होने लगी। रथ निर्माण के लिए लगभग डेढ़ सौ लोगों की आवश्यकता होती है। इस संबंध में रथ निर्माण के मुखिया दलपति ने जानकारी दी की रियासत काल में समर्पण की भावना अलग थी, अब यह कार्य समर्पण की भावना से करना कठिन है । लोग अपने घर बार खेती किसानी छोड़कर अगर यहां आते हैं तो साल भर का नुकसान हो जाता है रथ निर्माण के लिए लोगों को पारिश्रमिक नहीं मिलता, इसीलिए संवरा समाज के लोग अपना काम छोड़कर नहीं आते । इन कारणों से अन्य जाति के लोगों से संवरा जाति के नाम से काम लिया जाता है । जब यह रथ बनाकर अपने गांव लौटते हैं तो अन्य जाति जनजाति के लोगों को पुनः अपने मूल जाति में सम्मिलित करने के लिए सामाजिक रीती-रिवाजों का पालन करना होता है, इसके लिए गांव के मुखिया के आदेश अनुसार जुर्माना राशि भरना होता है । साथ ही समाज में पुनः सम्मिलित करने के लिए सामाजिक भोज के लिए बकरा भी देना होता है, तब जाकर प्रत्येक व्यक्ति का शुद्धिकरण किया जाता है, पश्चात ही गांव में प्रवेश दिया जाता है, यह परंपरा अनवरत आज भी जारी है।

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