आजादी के सत्तर सालों बाद भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे अबूझमाडिय़ा क्षेत्र

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नरेश, 22 जून।

अबूझमाड़ की अमीर धरती के गरीब लोग आजादी के सत्तर सालों बाद भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे अबूझमाडिय़ा क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों को लगातार मिल रहा मंत्री का ओहदा जगदलपुर नरेश कुशवाह। संभाग के नारायणपुर जिले का अबूझमाड़ क्षेत्र जिसे नक्सलीयों की पनाहगार माना जाता है लेकिन इस क्षेत्र में नक्सली लगातार क्यों फल-फूल रहे हैं इसको लेकर आजादी से अबतक राजनेताओं एंव अफसरशाहों ने नहीं की इस क्षेत्र के लिए पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी द्वारा कहा गया था कि अमीर धरती के गरीब लोग जो वन एंव संपदा से अपना भरण पोषण कर रहे हैं। हालत यह है कि बस्तर से लेकर बीजापुर एंव दंतेवाड़ा जिले से इस अबूझमाड़ क्षेत्र की सीमा मिलती हैं परंतु विकास के नाम पर अफसरों एंव नेताओं के लूट का अड्डा बनकर रह गया है। सरकार द्वारा इस क्षेत्र के विकास लिए आनी वाली योजनाएं किस तरह संचालित होती है यह कहना काफी मुश्किल है क्योकि अघोषित रूप से विकासखंड मुख्यालय ओरछा के आगे किसी भी बाहरी व्यक्ति का प्रवेश वर्जित है यहां सुरक्षा बलों के लगातार दबाव के बाद भी उनकी सरकार कायम है यहां तक की जाटलूर एंव अन्य गांवों से साप्ताहिक बाजारों में केवल ग्रामीण पैदल अथावा दो पहिया से आना जाना करते है उसका भी टैक्स लिया जाता है। साप्ताहिक बाजार ओरछा में ग्रामीण सरकार की हाट-बाजार क्लीनिक में पहुँचकर छोटी-मोटी बीमारी की दवा लेते है। विकासखंड मुख्यालय में विकासखंड स्तर के ज्यादातर अधिकारी नाराणपुर में रहकर अपनी नौकरी बजाते है। हाटबाजार क्लीनिक के कर्मचारीयों के अनुसार उनकी पास आने वाले बीमारों में चर्म रोग एंव खून की कमी पेचिया जैसी बीमारी की दवा लेने ग्रामीण आते है। और इससे आगे कोई भी वाहन जाटलूर मार्ग पर नहीं जाने के कारण ग्रामीण सिरहा-गुनिया के भरोसे अपना जीवन काटने को मजबूर है। नक्सली दहशत के कारण सड़क निर्माण करने को कोई ठेकेदार आगे नहीं आता है और सरकारी अफसर भी खानापूर्ति में लगे हैं। ओरछा से लेकर जिला मुख्यालय तक की सड़क खदान संचालक की लौह अयस्क परिवहन करने वाली ट्रकों के कारण पैदल चलने के लायक ही बची है। इस क्षेत्र का सौभाग्य मानें अथवा र्दुभाग्य की राज्य विभाजन के बाद इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले विधायक को मंत्री का ओहदा मिलने के बाद भी क्षेत्र की जनता का दारूण दुख देखने की कोशिश जनप्रतिनिधि नहीं करते हैं। जिसके कारण आज भी यह क्षेत्र अबूझमाड़ बन कर रह गया है। और सरकार एंव जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा का फायदा उठाकर नक्सल संगठन ग्रामीणों को सरकार के खिलाफ संगठित करने में सफल हो रहे हैं।

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