छत्तीसगढ़ की पहली महिला कृषक- धान की 300 किस्मों की कर रहीं है संरक्षित

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करीम
जगदलपुर, 25 जुलाई। आदिवासी बहुल बस्तर जिले में एक ऐसी कृषक महिला हैं जो छत्तीसगढ़ की पहली महिला होगी जो धान की 300 किस्मों को संरक्षित करने में जुटी हैं.
प्रभाती ने बताया कि 8 एकड़ खेतों में 100 से अधिक वन औषधि की खेती कर रही हैं.जगदलपुर से सटे ग्राम छोटे गारावंड में प्रभाती भारत को मेडिशनल प्लांट और धान के 3 सौ से अधिक प्रजाति के सरक्षण को देखते हुए भाभा रिसर्च सेंटर मुम्बई,विलेज बॉटनिक बेंगलुरु,कृषि मंत्रालय भारत सरकार,इंदिरा गाँधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर ने सम्मानित तथा सर्टिफिकेट मिला है.प्रभाती भारत हर वर्ष सरकारी स्कूलों और पंचायतों में निःशुल्क 20 हजार मेडिशनल प्लांट देतीं है.प्रभाती भारत छत्तीसगढ़ की ऐसी पहली महिला कृषक है जो विलुप्त होती जड़ी बूटी और धान की प्रजाति को बचाने में जुटी हैं.
बस्तर की महिला कृषक प्रभाती भारत और उनके पति विजय भारत धान की 300  किस्मों को संरक्षित करने में जुटे है,छोटे गारावंड में भारत तीसरी पीढ़ी की  कृषक है.इससे पहले रम्भा महांती फिर सुशीला भारत अब प्रभाती भारत धान की किस्मों को संरक्षित कर रहीं है, भारत परिवार 1915 से यहाँ धान को संरक्षित कर रहा है. प्रभाती भारत के अनुसार उनके खेत में शंकर भोग,लोकटी मच्छी,विष्णु भोग,शीतल भोग, बुटवन, भामरी, दंतेस्वरी बासमती,हल्दीगाठी,टिमरू धान, जिलका जुडी, काली मुछ, सिधवान, चिमड़ी धान,करायत,गुरमुटीया,सकरी,लुचाई,देव भोग, बासमती,सफरी सहित अन्य धान की किस्मों को प्रभाती संरक्षित कर रहीं है.
उन्होंने बताया कि इन किस्मों में से विष्णु भोग और शीतल भोग किस्म को बस्तर राजपरिवार के लिये उगाया जाता था.छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा इसलिए भी कहा गया क्योंकि यहां केवल धान की 23 हजार से ज्यादा किस्में हैं.इतनी देश के किसी राज्य में नहीं है.यही नहीं दुनियाभर में फिलीपींस ही ऐसा देश है जहां छत्तीसगढ़ से ज्यादा धान की किस्में हैं. बस्तर के जंगल में विभिन्न प्रकार के औषधि, जड़ी-बुटी,कंद-मूल,वनस्पति आदि पाये जाते हैं.बस्तर अनेक प्रकार के खाद्य पदार्थों से भरपूर है.इन जड़ी बूटियों को भी प्रभाती संरक्षित कर रहीं है.

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