नक्सली बैकफुट पर है-बेहतर तालमेल में चल रहा ऑपरेशन-डीजी सीआरपीएफ

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जगदलपुर, 24 मार्च। छतीसगढ़ के बस्तर पहुँचे सीआरपीएफ डीजी डॉ सुजॉय लाल थाउसेन ने कहा है कि नक्सलवाद धीरे धीरे सिमट रहा है.बहुत जल्द हम एक निर्णायक स्तिथि में होंगें.जब से छत्तीसगढ़ में नक्सली घटनाएं बढ़ने लगी राज्य और केंद्र सरकार की मदद से फोर्स डिप्लॉयड की गई.वर्तमान में 38 यूनिट है जो स्थानिय पुलिस के साथ मिलकर काम कर रही है.जिसके चलते घटनाओं में काफी कमी आई है.सिविलियन्स हो या अधिकारियों की हत्या मामले में भी कमी देखी जा रहीं है.सीआरपीएफ डीजी ने कहा की बस्तर में विकास हो इस दिशा में विगत दो वर्षों में फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस(FOB) का गठन किया गया है.उन्हीं केम्पों से ऑपरेशन चलाई जा रही है.FOB बनने से नक्सल इलाकें में सड़क,पूल पुलिया,स्कूल बन रहें है.युवा जो अन्य राज्य में रोजगार की तलाश में जाते थे वे भी अब वापस आ रहें है.नक्सल इलाकें में हाट बाज़ार लगने लगें है.विकास के साथ साथ लोगों की आमदनी में भी बढोतरी हो रही है.डीजी CRPF डॉ सुजॉय लाल थाउसेन ने प्रेसवार्ता में कहा की वर्तमान में ऑपरेशन प्लान को जारी रखा गया है.

 

लोकल पुलिस के मदद और सहयोग से चिन्हित मिलिट्री लीडर्स को टारगेट कर रहें है.उनका खत्मा ही एक मात्र मकसद है.ऑपरेशन के जरियें अधिक से अधिक क्षेत्र को कवर करना सीआरपीएफ की प्राथमिकता हैं.सीआरपीएफ विश्व का सबसे बड़ा अर्धसैनिक बल है,हमारे जवान सभी राज्य में किसी ना किसी समस्या के खात्मे के लिये काम कर रहें है.मेजर फुट प्रिंट के तहत जम्मू कश्मीर,मध्य प्रदेश,छत्तीसगढ़,बिहार,झारखंड सहित नार्थ ईस्ट इलाकों में सीआरपीएफ के जवान बेहतर काम कर रहें है.छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके में स्थानीय नागरिकों,क्षेत्रीय पुलिस की मदद से सीआरपीएफ अधिक से अधिक क्षेत्र को नक्सल मुक्त करने की योजना बनाई है.डीजी ने केंद्रीय मंत्री के बस्तर प्रवास को सुखद बताते कहा की गृह मंत्री के आने से इलाके में काम करने वाले जवानों में सकारात्मकता आएगी और वे बेहतर काम कर पायेंगें.सीआरपीएफ का काम केवल मोर्चें पर तैनात रहना ही नही बल्कि सामजिक सरोकार की दिशा में काम करना भी है.समाजिक बुराई से लड़ना,सुरक्षा की जो जिमीदरी दी है उसे पूरा करना और महिला शसक्तीकरण को बढावा देना भी है.इसी लिये दिल्ली से महिलाओं के उत्थान और शसक्तीकरण के लिये महिला बाइकर्स की टीम बस्तर आ रही है.जो समाजिक समरसता का मैसेज दे रहीं है.एक सवाल पर डॉ सुजॉय लाल ने कहा की मुठभेड़ के बाद घायल जवानों को सही समय में राहत नही मिल पाती है.इसके लिये जगदलपुर में एक ट्रामा सेंटर की स्थापना के लिये प्रसत्व भेजा गया था और हर्ष का विषय है की बिल्डिंग का प्रस्ताव पास कर दिया गया है.डॉक्टरों और अन्य फेकेल्टिज का प्रसत्व पेंडिंग है.इसके अलावा बस्तर सहित राज्य के नक्सल इलाके में नाईट लेंडिग की समस्या भी जल्द दूर करने का प्रयाश जारी है वर्तमान में 14 स्थालों में ही नाईट लेंडिग की सुविधा है.लुटे गये हथियार का उपयोग नक्सली ना कर पायें के सवाल पर डीजी सीआरपीएफ ने कहा की आधुनिक हथियार में अतिरिक्त फेसिलिटी,डेवलंपेन्ट स्टेज पर है जल्द जवानों को आधुनिक हथियार से लैस करने की योजना पर काम किया जा रहा है.उन्होंने कहा की बीते वर्षो की तुलना में हथियार कम लुटे गयें हैं.हमने कई गलतियां से काफी कुछ सीखी है.किधर से जाना है कहा जाना है.कैसे जाना है इन बातों पर ध्यान भी दिया जा रहा है.इसीलिये हम FOB केम्प बना पाए है.जितना विकास बस्तर हो रहा है उसमेंCRPF का बड़ा योगदान रहा है.कोर एरिया में कैम्प बना रहे है ताकि दूसरे राज्य से नक्सली भाग कर यहा ना आयें इसलिये सीमावर्ती राज्यों से ताल मेल कर काम कर रहें है.यही कारण है की नक्सलियों का ट्रेनिग सेंटर कम हुये.बड़े लीडर्स का दूसरे राज्य में आना जाना कम हुआ.जवानों के आत्महत्या के सवाल पर डीजी डॉ सुजॉय लाल ने कहा की जो समाज मे जो होता है उसका रिफ्लेक्शन जवानों में होता है.उसका प्रतिविम्ब भी जवानों में देखा जाता है.मोबाइल में वीडियो काल से घर की विपरीत परिस्थितियों से अवगत होते है इसीलिए जवान ऐसा कदम उठाते है.मानसिक संतुलन बनाये रखने के लिये जवानों को 60 दिन का इएल 15 दिन का सीएल और समय समय पर छुट्टी दी जाती है.हवाई हमले के सवाल पर डीजी ने कहा की ड्रोन सिर्फ सर्विलांस के लिये उपयोग में लाया जाता है ना की ऑपरेशन के लिये.जो भी आरोप लगाते है वे केम्प का विरोध करने वाले होते है वे कौन लोग है हम जानते है.स्थानीय पुलिस के साथ कॉर्डिनेशन नही होने का भी आरोप लगते रहते है यह आरोप निराधार है. फोर्स पुलिस के साथ मिलकर बेहतर तालमेल के साथ है बढ़िया काम कर रही है. हमारा काम केवल ऑपरेशन करना ही नही है.हम क्षेत्र का विकास हो उस दिशा में भी काम कर रहें हैं.हम लोगों की जरूरतों को भी ध्यान देते है.हमारी प्रथमिकता लोगों से जुड़ना भी है.

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